US Aircraft Carrier पर IRGC का Missile Attack- Game और ख़तरनाक

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

मिडिल ईस्ट का आसमान इन दिनों सिर्फ ड्रोन और मिसाइलों से नहीं, बल्कि दावों और पलटवारों से भी भरा हुआ है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं.

यह कार्रवाई ऑपरेशन ‘True Promise 4’ के तहत की गई. बयान में कहा गया कि यह अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों का जवाब है.

समुद्र में तैरता यह 100,000 टन का सैन्य शहर अब भू-राजनीतिक शतरंज का केंद्र बन गया है.

Khameenei के बाद तेज हुआ टकराव

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर ने आग में घी का काम किया. अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अभियान के बाद क्षेत्रीय समीकरण अचानक बदल गए.

जनवरी में USS Abraham Lincoln तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर के साथ क्षेत्र में पहुंचा था. बाद में दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford भी भूमध्यसागर में तैनात हुआ.

कुल मिलाकर 10,000 से अधिक अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती ने यह संकेत दिया कि यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि पूरी तैयारी है.

Drone, Missile और Narrative War

शनिवार से शुरू हुए समन्वित हमलों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. इजरायल ने तेहरान पर बड़े हमले किए, तो जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया.

इसी बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की जनता से राजनीतिक परिवर्तन का अवसर लपकने की अपील की. बयान ने कूटनीति के बजाय राजनीतिक भूकंप का संकेत दिया.

यह सब तब हुआ जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की कोशिशें चल रही थीं. बातचीत की मेज़ पर रखे कागज़ अब बारूद की गंध में भीगते दिख रहे हैं.

Power Projection या Pressure Politics?

एयरक्राफ्ट कैरियर सिर्फ जहाज़ नहीं होते, वे चलते-फिरते संदेश होते हैं. एक Carrier पर हमला, चाहे दावा ही क्यों न हो, सीधे-सीधे समुद्री शक्ति संतुलन को चुनौती देता है.

Gulf अब तेल और टूरिज्म से ज्यादा मिसाइल मैथमेटिक्स की सुर्खियों में है. सवाल यह है कि क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या वैश्विक समुद्री व्यापार की धड़कन को भी झटका देगा?

Middle East इस समय शतरंज की वह बिसात बन चुका है जहां हर चाल का असर सिर्फ मोहरे पर नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

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